समझने और समझाने में ना जाने कितने वक़्त निकल गए …
ये सोच के ना जाने कितने वक़्त निकल गए ।।
तेरे हुए और नहीं भी …
ना जाने कितने वक़्त ये सोचने में निकल गए।।
ये वक़्त !! मेरा या तुम्हारा ….बस होने से पहले …
…….. कहीं दूर तुम निकल गए ।।
साथ पाना या साथ होना …
आज बस काश में ही रह गए ।।
कब तक ये सिलसिला चलेगा नहीं जानते …
उम्मीद है …उम्मीद के सहारे ये जिंदगी यू गुज़र जाए !!
ना उम्मीद ना सहारा …
बस तेरे होने के एहसास मे ही गुज़र जाए ।।
खामोशी की जिद हमारी है …
पर तुझे खुश रखने की जिद भी …
शायद आसान नहीं है …
पर फिर भी ये जिद हमारी है !!
तुम्हें खोने के डर से ना जाने क्यूँ डरने लगे हैं …
समझने और समझाने में ना जाने कितने वक़्त निकल गए…
ये सोच के ना जाने कितने वक़्त यूहि निकल गए ।।









